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कैप्टन सरकार में भी एक मजबूत विपक्षी नेता बने रहेंगे नवजोत सिंह सिद्धू

By संपादकीय 13.03.2017

Published on 15 Mar, 2017 01:19 PM.

पंजाब में अंतत: एक बार फिर कांग्रेस ध्वनिमत के साथ सत्ता में लौट आई है। चुनाव में जिस प्रकार कांग्रेस ने 77 सीटों पर जनादेश हासिल किया, साफ है कि राज्य की जनता का मन दशक तक सत्ता पर काबिज रहे शिरोमणि अकाली दल (बादल) व भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन, इसकी नीतियों व आपसी खींचतान के चलते प्रभावित हुई अमन-शांति के कारण काफी खट्टा हो चुका था। कोई शक नहीं कि अब कैप्टन अमरेन्द्र सिंह मुख्यमंत्री बनेंगे और राज्य में पांच साल तक दो गुटों में बंटे अल्पसंख्यक व कमजोर विपक्ष के सामने सीना तान कर राज करेंगे लेकिन पर्दे के पीछे एक अटल सत्य है जो उनको भी अंदर ही अंदर परेशान भी कर रहा है। वो यह कि उनको भी दशक तक जारी रही शिअद-भाजपा की आसपी खींचतान की भांति भाजपा से कांग्रेस में सशर्त आए नवजोत सिंह सिद्धू से आपसी खींचतान का शिकार होना पड़ेगा। मतलब साफ कि कैप्टन को भी सत्तापक्ष में भागीदार नवजोत सिंह सिद्धू को हर कदम पर सहमति बनाकर चलना होगा। जैसा कि गठबंधन नीति के तहत शिअद भागीदार भाजपा के साथ बनाकर चलता आ रहा था। मगर सिद्धू व कैप्टन की आपस में कहां पटती है, सर्वविदित है। पब्लिक है, सब जानती है कि दोनों के दुश्मन एक थे इसलिए दोनों ने सत्ता प्राप्ति के लिए हाथ मिला लिया, हालांकि दिल नहीं मिले होंगे क्योंकि एक बार दोनों का आमने-सामने मुकाबला भी हो चुका है और एक-दूसरे के प्रति कड़वे कटाक्ष तक हो चुके हैं। ऐसा कहा जा सकता है कि कैप्टन को अब पंजाब के फैंसले सिद्धू को विश्वास में लेकर ही करने होंगे अन्यथा उनको सिद्धू के सत्तापक्ष में रहते एक मजबूत विपक्षी नेता के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। यह बात सभी जानते है कि सिद्धू ने शिअद-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान बादल सरकार का खुलकर साथ दिया था। इसके लिए उन्होंने केंद्र की तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ खूब तंज कसे थे। बावजूद इसके बादल परिवार ने उनके साथ कई बार सौतेला व्यवहार किया। भाजपा ने उनकी पैरवी नहीं की तो उन्होंने इसका बदला भाजपा को अलविदा कहकर ले लिया और आवाज-ए-पंजाब के नाम से प्लेटफार्म बना डाला लेकिन ऐन मौके पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के आश्वासन पर सिद्धू कांग्रेस में आए। इससे पहले उन्होंने जो हाल सत्तापक्ष में रहकर शिअद-भाजपा का किया, यह कांग्रेस के सभी उच्च स्तरीय नेता भली-भांति जानते हैं और खुद कैप्टन अमरेन्द्र सिंह भी। चूंकि कैप्टन अब काफी सालों बाद पंजाब में अपना जलवा दिखाने जा रहे हैं इसलिए उनको सशर्त कांग्रेस में आए नवजोत सिंह सिद्ध्रू व उनके कोटे वाले नेताओं को पूरा सम्मान देना होगा अन्यथा कैप्टन को सिद्धू सत्तापक्ष के मजबूत विपक्षी नेता का जलवा भी दिखा सकते है। अब देखना शेष है कि कैप्टन कैसे संतुलन बनाकर रखते हैं। -जय हिन्द

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