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गैंगस्टर्स के सामने बौनी साबित होने लगी कद्दावर पंजाब पुलिस

Published on 04 Jun, 2018 07:42 PM.

अमृतसर नगर निगम के पार्षद गुरदीप सिंह पहलवान को गत दिवस गैंगस्टर्स ने हाईअलर्ट के बीच ताबड़तोड़ फायरिंग करके मौत की नींद सुला दिया। इस सनसनीखेज घटना में पार्षद गुरदीप बेशक मौत की गहरी नींद सो गया लेकिन घटना पंजाब पुलिस के लिए चुनौती का अलार्म बजा गई। पंजाब पुलिस के लिए यह शर्म की बात ही है कि राज्य सरकार के मंत्री एवं बड़े नेतागण घटना के बाद कमजोर कानून-व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते दिखाई दिए। पंजाब पुलिस के लिए यह शर्म से डूब मर जाने वाली स्थिति ही मानी जाएगी क्योंकि घटना वाले दिन राज्य पुलिस प्रमुख सुरेश अरोड़ा आप्रेशन ब्लू स्टार की बरसी के दृष्टिगत किए हाई-अलर्ट व अन्य सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लेने अमृतसर आए हुए थे और जायजा लेने के बाद उन्होंने सुरक्षा प्रबंधों के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए यह दावा भी किया था कि पुलिस प्रबंध इतने पुख्ता है कि कोई अमन-कानून को भंग नहीं कर पाएगा। अब हाई अलर्ट के बारे में आम जनता भली-भांति परिचित है कि इस दौरान चप्पे-चप्पे पर फोर्स को तैनात किया जाता है, नाकाबंदी करके वाहनों की चैकिंग की जाती है, संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जाती है, जमानत पर आए अपराधियों की मूवमैंट को लेकर अपडेट्स जुटाए जाते हैं इत्यादि-इत्यादि। मगर बावजूद इसके जैसे ही राज्य पुलिस प्रमुख के अमृतसर से चंडीगढ़ रवाना होने की खबर मिली, पार्षद गुरदीप के कत्ल की खबर उनसे पहले चंडीगढ़ तक पहुंच गई। कारण, एक तो वो पार्षद और दूसरा यह कि वह सत्ताधारी कांग्रेस की टिकट पर जीता हुआ था। हैरत यह भी कि वो पिछले काफी समय से गैंगस्टर्स के नैटवर्क को ब्रेक किए जाने की दिशा में अभियान चलाए हुए था। ऐसा कहा जा रहा था कि वह पुलिस व खुफिया एजैंसियों की मदद भी कर रहा था कि ताकि गैंगस्टर्स का सफाया हो पाए। यदि ऐसा था तो सवाल स्वत: पनपता है कि पुलिस ने उनकी सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध क्यों नहीं किए? सवाल यह भी कि ऐसे कैसे हाई अलर्ट में हत्यारे हथियारबंद होकर सिटी में घुस आए और फिर हत्या करके बड़ी आसानी से नाके पार करके फरार भी हो गए। अब सवालिया निशान यह कि पंजाब पुलिस के लिए करोड़ों का बजट, हर नई तकनीक ,सुविधा व सयंत्र, आधुनिक हथियार, रैगुलर पुलिसिंग से हटकर दर्जन भर खुफिया व इन्फोर्समैंट एजैंसियां, एंटी टैरेरिस्ट-एंटी गुंडा स्कवॉयड। इस सब तामझाम के बाद भी गुंडे-बदमाशों के हौंसले इस कदर कि न तो उनको सरेआम गोलीयां चलाकर हत्या करने में कोई खौफ। और अगर पकड़े भी गए तो जेलें पहले ही उनकी ऐशगाह हैं, उसको भी ब्रेक करना या फिर कस्टडी से भाग निकलना उनके बाएं हाथ का खेल है जो इस समय पंजाब पुलिस के फेल होने के साक्षात प्रमाण पेश कर रहा है। यूं कहे कि पंजाब पुलिस अब गैंगस्टर्स के सामने बौनी होती दिखाई दे रही है, तो कोई भी गलत नहीं कहेगा। यहां तक कि खुद सरकार के मंत्री ओम प्रकाश सोनी ने अपने बयान में खुद को पंजाब पुलिस की व्यवस्था को लेकर शर्मसार महसूस बताया। हो भी क्यों न आतंकवादी हमले, ड्रग स्मगलिंग, गैंगस्टर्स का आतंक यहां तक कि अनुशासनहीनता व आंतरिक खींचतान सुरेश अरोड़ा के डीजीपी बनने के बाद से ही बढ़ी है। विवाद का कारण यह भी माना जा रहा है कि वह अपने मनपसंद अफसरों को फील्ड में लगा रहे हैं जिनका सुरक्षा प्रबंधों व विपरीत स्थितियों का मुकाबला करने में अनुभव काफी कम है। बड़ी घटना के बाद मंत्री-नेताओं के इस्तीफे मांगने की बातें तो आम थी लेकिन अब डीजीपी की इस्तीफे को लेकर भी लोगों के स्वर मुखर होने लगे हैं। राज्य के सीएम कैप्टन अमरेन्द्ग सिंह को अब कम से कम डीजीपी के प्रति अपना मोह छोड़ना होगा और विवादित डीजीपी को तत्काल बदलना होगा ताकि राज्य का माहौल और खराब न हो।

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