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भ्रष्टाचार के सवालों के घेरे में जालंधर का यह एसीपी, पढ़िए क्यों?

By JNN/Jalandhar

Published on 02 Jan, 2019 04:54 PM.

जय हिन्द न्यूज/जालंधर। पंजाबी की कहावत है कि जदों कुत्ती ही चोरां नाल रल्ल जावे तां सुधार कित्थों होना। यह कहावत दिनों जालंधर की ट्रैफिक पुलिस पर एकदम सटीक बैठ रही है। दरअसल मामला यह है कि सिटी पुलिस ने एक टैक्स चोरी की जांच के घेरे में आए कथित ठेकेदार को लोगों के गलत पार्क वाहनों को उठाने का ठेका दे रखा है जबकि वही ठेकेदार धड़ल्ले से हर रोज गलत पार्किंग कर रहा है। मामला गत दिवस जालंधर के मीडिया की ओर से लिखित में उठाया गया लेकिन ट्रैफिक पुलिस के एसीपी जंग बहादुर शर्मा ने एक्शन लेने के नाम पर सिर्फ आईवाश कर डाला। चूंकि उसी ठेकेदार से काम लिया जा रहा है, तो एसीपी जंग बहादुर शर्मा की सैटिंग होनी भी स्वाभाविक ही है। जानकारी के मुताबिक स्टाफ ने वहां दो बार दिखावे की कार्रवाई की लेकिन उससे पहले ही ठेकेदार जोकि न्यू पंजाब कार बाजार का मालिक भी है, को सूचित कर दिया। सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पत्रकारों की लिखित शिकायत पर पुलिस ने क्या रंग दिखाया और आम जनता की शिकायत पर एक्शन तो भूल ही जाएं। कथित ठेकेदार जसबीर सिंह पर मेहरबानी भी इस कदर की उसके ठेके की खामियां उजागर होने के बाद उसका ठेका एक महीने के लिए बढ़ा दिया जबकि उसके अपने वाहन टो करने के लिए उपयुक्त नहीं है। ठेकेदार पर मेहरबारी भी इस कदर है कि एसीपी जंग बहादुर शर्मा ने अपने नाकों पर भी एनजीओ पूरे कर रखे हैं और कागजों में ठेकेदार के साथ भी एनजीओ को लगा रखा है जबकि ऐसा हो ही नहीं रहा। ठेके की शर्तों के मुताबिक किसी का गलत वाहन टो करते समय वहां ठेके की टो-अवे वैन के साथ कम से कम ए.एस.आई का होना जरूरी है लेकिन वहां कांस्टेबल को भेजा जा रहा है। कहीं-कहीं तो वो भी नहीं। अब ऐसे हालातों में जब एसीपी जंग बहादुर शर्मा को कार्रवाई का आदेश भी हुआ लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है, तो यह अप्रत्यक्ष तौर पर भ्रष्टाचार का संकेत देता है। भ्रष्टाचार कानून में इसका प्रावाधान भी है कि चाहे पैसे लिए हो या न लिए हो। सरकारी अफसर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह न करके किसी को अप्रत्यक्ष तौर पर लाभ या राहत प्रदान कर रहा हो तो वो भी भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है जिसके लिए कानून की धारा 13 के तहत कार्रवाई का प्रावधान तय है। हालांकि अपनी सफाई में एसीपी जंग बहादुर शर्मा का कहना है कि ऐसा नहीं है कि वो किसी की फेवर कर रहे हैं लेकिन उनका पक्ष सुनने के बाद एक बार भी स्पष्ट नहीं होता क्योंकि समस्या तो जस की तस बनी हुई है। कुल मिलाकर सारे हालात एसीपी ट्रैफिक जंग बहादुर शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के संकेत देने लगे है कि वो कहीं न कहीं ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उसकी कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं। अब देखना शेष होगा कि सिटी के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर जिन्होंने पत्रकारों की ओर से उठाए मामले को जायज मानते हुए सख्त कार्रवाई का आदेश दिया था, एसीपी की जबावतलबी करते है या नहीं।

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